भारतीय मूल के वैज्ञानिक गुरतेज सिंह संधू ने वैश्विक नवाचार में रचा इतिहास

भारतीय मूल के वैज्ञानिक गुरतेज सिंह संधू ने वैश्विक नवाचार में रचा इतिहास

अमृतसर: भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. गुरतेज सिंह संधू ने वैश्विक नवाचार के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। दुनिया के शीर्ष सात आविष्कारकों में शामिल डॉ. संधू के नाम 1,380 से अधिक अमेरिकी पेटेंट दर्ज हैं, जिससे उन्होंने महान आविष्कारक थॉमस एडिसन को भी पीछे छोड़ दिया है।

पंजाब के अमृतसर में जन्मे डॉ. संधू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से पूरी की और इसके बाद आईआईटी दिल्ली में अध्ययन किया। आगे चलकर उन्होंने अमेरिका में भौतिकी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक करियर की शानदार शुरुआत हुई।

सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास में डॉ. संधू की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। एटॉमिक लेयर डिपॉज़िशन (ALD) और उन्नत चिप निर्माण में उनके क्रांतिकारी कार्यों ने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में आमूलचूल परिवर्तन ला दिया। आज स्मार्टफोन, कंप्यूटर, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी डिवाइस जैसी आधुनिक तकनीकों की नींव इन्हीं नवाचारों पर टिकी है।

वर्तमान में डॉ. गुरतेज सिंह संधू दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनियों में से एक माइक्रोन टेक्नोलॉजी में सीनियर फेलो और वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत हैं। ठोस अवस्था उपकरण तकनीक में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें IEEE एंड्रयू एस. ग्रोव अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।

पंजाब की गलियों से लेकर वैश्विक तकनीक की अग्रिम पंक्ति तक डॉ. संधू की यात्रा भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा और वैश्विक नेतृत्व का सशक्त प्रमाण है। उनकी उपलब्धियाँ युवा पीढ़ी को नवाचार, अनुसंधान और STEM क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
— हिंद समाचार न्यूज़

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