वरिष्ठ नागरिकों के गिफ्ट डीड बिना भरण-पोषण शर्त के भी वैध; पारिवारिक विवाद में डीएनए जांच याचिका खारिज: हाईकोर्ट

वरिष्ठ नागरिकों के गिफ्ट डीड बिना भरण-पोषण शर्त के भी वैध; पारिवारिक विवाद में डीएनए जांच याचिका खारिज: हाईकोर्ट

चंडीगढ़: दो महत्वपूर्ण टिप्पणियों में, हाईकोर्ट ने कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों द्वारा निष्पादित गिफ्ट डीड को केवल इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसमें स्पष्ट भरण-पोषण की शर्त नहीं है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, अदालत ने पारिवारिक विवाद में पितृत्व स्थापित करने के लिए डीएनए जांच कराने की याचिका भी खारिज कर दी, और व्यक्ति की गरिमा व निजता की रक्षा पर जोर दिया।

भरण-पोषण की शर्त अनिवार्य नहीं
एक बुजुर्ग माता-पिता द्वारा परिवार के सदस्य को संपत्ति हस्तांतरित किए जाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गिफ्ट डीड के वैध होने के लिए उसमें भरण-पोषण की स्पष्ट शर्त होना अनिवार्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि यह अधिनियम वरिष्ठ नागरिकों को उपेक्षा और शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है, लेकिन गिफ्ट डीड में भरण-पोषण की शर्त न होने से संपत्ति का हस्तांतरण स्वतः अमान्य नहीं हो जाता। हालांकि, यदि यह सिद्ध हो जाए कि संपत्ति इस समझ के साथ दी गई थी कि प्राप्तकर्ता वरिष्ठ नागरिक की देखभाल और भरण-पोषण करेगा और बाद में उस दायित्व का पालन नहीं किया गया, तो वरिष्ठ नागरिक को कानूनी उपायों का सहारा लेने का अधिकार रहेगा।

इस फैसले से वरिष्ठ माता-पिता द्वारा की गई संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े कई विवादों में स्पष्टता आने की उम्मीद है।

डीएनए जांच की मांग खारिज

पितृत्व से जुड़े एक पारिवारिक विवाद में, हाईकोर्ट ने डीएनए जांच कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह के आदेश बिना ठोस आधार के नहीं दिए जाने चाहिए।

अदालत ने माना कि डीएनए जांच का आदेश किसी व्यक्ति की निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। ऐसे परीक्षण तभी कराए जा सकते हैं जब मजबूत प्रथम दृष्टया मामला हो और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायपूर्ण निष्कर्ष तक पहुँचना संभव न हो।

पीठ ने विशेष रूप से कहा कि बच्चे की वैधता से जुड़े मामलों में, सच्चाई की खोज और सामाजिक व मानसिक प्रभावों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

कानूनी और सामाजिक प्रभाव
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े संपत्ति विवादों में वृद्धि और वैवाहिक व उत्तराधिकार मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में ये फैसले अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ये निर्णय न्यायपालिका के उस प्रयास को दर्शाते हैं जिसमें वैधानिक संरक्षण, पारिवारिक अधिकारों और निजता व गरिमा जैसे संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित किया गया है।
अदालत ने पक्षकारों को कानून के अनुसार अन्य उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देते हुए मामलों का निपटारा कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *