कांग्रेस सरकार का विस्तार: 54 और नेताओं को मिला मंत्री दर्जा
कांग्रेस-नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए विभिन्न बोर्डों और निगमों के 54 अतिरिक्त अध्यक्षों और प्रमुखों को मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। इसके साथ ही मंत्रियों और समकक्ष पदों की कुल संख्या 149 हो गई है।
मंगलवार देर शाम घोषित इस फैसले को आगामी चुनावी चुनौतियों से पहले एक बड़ा राजनीतिक विकास माना जा रहा है। इस विस्तार के तहत कई वरिष्ठ पार्टी नेताओं और निष्ठावानों को राज्य संचालित संस्थानों, आयोगों और सार्वजनिक उपक्रमों में प्रमुख पदों पर स्थान दिया गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नव-नियुक्त अध्यक्षों और बोर्ड प्रमुखों को अब राज्य मंत्री के समकक्ष सुविधाएं मिलेंगी। इन सुविधाओं में आमतौर पर सरकारी आवास, स्टाफ, वाहन और अन्य भत्ते शामिल होते हैं।
इस कदम पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर “तुष्टीकरण की राजनीति” करने और राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह विस्तार शासन को मजबूत करने के बजाय आंतरिक राजनीतिक संतुलन साधने के उद्देश्य से किया गया है।
हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों के सुचारू संचालन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए ये नियुक्तियां आवश्यक थीं। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, “इन नियुक्तियों से कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के तेज क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में समर्थन को मजबूत करने की पार्टी की रणनीति को दर्शाता है।
मंत्रियों और मंत्री-समकक्ष पदों की संख्या 149 तक पहुंचने के बाद राज्य में सरकार के आकार और सार्वजनिक खर्च को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है।
नव-नियुक्त अधिकारियों के विभागों और जिम्मेदारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी आने वाले दिनों में जारी किए जाने की उम्मीद है।

