डी.के. शिवकुमार की कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात; कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज

डी.के. शिवकुमार की कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात; कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज

बेंगलुरु/नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026 : कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें बुधवार को उस समय तेज हो गईं, जब उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की।

इस मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्तारूढ़ व्यवस्था के भीतर संभावित बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि कांग्रेस ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बैठक के समय ने राजनीतिक कयासों को और हवा दी है।

मुलाकात से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
पार्टी सूत्रों ने इस बैठक को “सामान्य परामर्श” बताया है और कहा है कि शिवकुमार शासन और संगठनात्मक मामलों पर केंद्रीय नेतृत्व से नियमित रूप से संवाद करते रहते हैं। हालांकि यह मुलाकात उस समय हुई है, जब कांग्रेस सरकार बनने के बाद से समय-समय पर रोटेशनल मुख्यमंत्री व्यवस्था की अटकलें सामने आती रही हैं।

न तो शिवकुमार और न ही पार्टी हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों पर कोई औपचारिक बयान दिया। पत्रकारों से संक्षेप में बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि चर्चा “राज्य के विकास, आगामी पार्टी कार्यक्रमों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं” पर केंद्रित थी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए आंतरिक खींचतान का आरोप लगाया। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया।

अटकलों के बीच शासन
राजनीतिक हलचल के बावजूद राज्य सरकार बुनियादी ढांचे के विकास, कल्याणकारी योजनाओं और निवेश प्रोत्साहन जैसी प्रमुख नीतिगत पहलों को आगे बढ़ा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सरकार में कोई संकट नहीं है और सुशासन ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रमुख चुनावों या नीतिगत घोषणाओं से पहले राज्य नेताओं का केंद्रीय नेतृत्व से मिलना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील कर्नाटक में ऐसी मुलाकातें अक्सर अटकलों को जन्म देती हैं।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है, जिससे यह बहस जारी है कि क्या यह केवल नियमित समन्वय है या कर्नाटक की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

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