पश्चिम एशिया संकट पर संसद में बहस की मांग
नई दिल्ली | 13 मार्च 2026:
भारत में विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके देश की अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा सुरक्षा पर संभावित प्रभाव को लेकर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है। कई विपक्षी दलों के नेता, जिनका नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे हैं, ने सरकार से भारत की ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित रखने और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को स्पष्ट करने की अपील की है।
विपक्ष ने चिंता व्यक्त की कि पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है, जिससे भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात पर सीधा असर पड़ सकता है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति से ईंधन की कीमतों में वृद्धि, महंगाई और घरेलू बाजार में संभावित कमी हो सकती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से संसद में एक व्यापक बयान देने की भी मांग की है, जिसमें संकट के आर्थिक प्रभाव से निपटने की सरकार की रणनीति को स्पष्ट किया जाए।
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि यह मुद्दा देश भर में लाखों परिवारों और व्यवसायों को प्रभावित कर सकता है, खासकर वे जो एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलती वैश्विक स्थिति से निपटने के लिए पारदर्शिता और तैयारी सुनिश्चित करने के लिए संसद में बहस आवश्यक है।
इस मुद्दे पर चर्चा की मांग से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के व्यापक प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
हिंद समाचार न्यूज़ डेस्क

By:- Divya sisel



