सावरकर को भारत रत्न देने से सम्मान की गरिमा बढ़ेगी: मोहन भागवत
मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने स्वतंत्रता सेनानी वी.डी. सावरकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया है। मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि यदि सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है, तो इससे इस सम्मान की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सावरकर आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में लगभग 1.25 करोड़ हिंदू रहते हैं और यदि वे वहीं रहकर संघर्ष करने का निर्णय लेते हैं, तो दुनिया भर के हिंदू उनका समर्थन करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि धर्म की परवाह किए बिना कोई भी आरएसएस का प्रमुख बन सकता है। अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होना कोई अयोग्यता नहीं है, जैसे ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। संगठन की शुरुआत भले ही ब्राह्मणों से हुई हो, लेकिन आज यह सभी जातियों के लिए कार्य कर रहा है।
आरएसएस की स्थिति स्पष्ट करते हुए भागवत ने कहा कि संगठन किसी के खिलाफ नहीं है और सत्ता की आकांक्षा नहीं रखता। समाज को एकजुट रखना ही आरएसएस का एकमात्र उद्देश्य है।

