संसद में बड़े बदलाव: डिजिटल उपस्थिति और एआई से बदलेगी लोकसभा की कार्यप्रणाली
नई दिल्ली: लोकसभा में कार्यकुशलता, अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े प्रक्रियात्मक और तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। सांसदों की उपस्थिति के कड़े नियम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का विस्तार इन सुधारों का हिस्सा हैं।
उपस्थिति नियम सख्त
अब सांसदों की उपस्थिति तभी मानी जाएगी जब वे सदन के भीतर अपनी निर्धारित सीटों पर बैठे हों। सदन के बाहर रखी जाने वाली उपस्थिति रजिस्टर प्रणाली खत्म की जाएगी।
सदन स्थगित होने के बाद आने वाले सांसदों की उपस्थिति नहीं मानी जाएगी। अनुपस्थिति का असर वेतन और दैनिक भत्ते पर पड़ेगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उद्देश्य प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
संसद में एआई की एंट्री
रियल-टाइम अनुवाद के लिए एआई का प्रयोग किया जा रहा है। फिलहाल इसकी सटीकता 80% है और मानसून सत्र से पूरी तरह एआई आधारित प्रणाली लागू करने की योजना है। चार घंटे का काम अब 30 मिनट में संभव होगा। सांसदों को शोध और डेटा विश्लेषण में भी मदद मिलेगी।
विपक्ष के लिए संदेश
अध्यक्ष ने कहा कि सदन को सुचारू रूप से चलाना सरकार की प्राथमिकता है। विपक्ष को बहस में पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी।
राज्य विधानसभाओं पर चिंता
हर राज्य विधानसभा को साल में कम से कम 30 दिन चलाने का प्रस्ताव रखा गया। कई राज्यों में बैठकों की संख्या घटने पर चिंता जताई गई।
अध्यक्ष की शक्तियों पर बहस
अध्यक्ष की शक्तियों की सीमाओं पर चर्चा जारी है।
कागजरहित संसद की ओर
संसद और अधिकांश विधानसभाएं कागजरहित हो चुकी हैं। कार्यवाही यूट्यूब पर लाइव दिखाई जा रही है।
महाभियोग मुद्दा
न्यायमूर्ति वर्मा से जुड़े मामले में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।




